रामनवमी

              त्रेता युग में राजा दशरथ के विवाह के बहुत दिन बाद भी पुत्र ना होने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी राजा दशरथ को वंश वृद्धि के लिए ऋषि वशिष्ठ ने कामेश्टी यज्ञ महा ऋषि महर्षि रूश्र्य श्रुंगा से अनुष्ठान करवाने की सलाह दी ।

            राजा को पायसम के एक कटोरे में खीर भरकर तीनों पत्नियों को आपस में बांटने को कहा राजा दशरथ ने कटोरी में कौशल्या और आधा कटोरी में कैकई को खीर दिया और फिर कौशल्या और कैकेई को अपने में से आधा- आधा कटोरी खीर सुमित्रा को देने के लिए कहा कौशल्या ने श्रीराम को कैकेई ने भरत को और सुमित्रा ने दो पुत्रों को जन्म दिया लक्ष्मण और शत्रुघ्न ।

नवमी के दिन प्रभु श्री राम का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में हुआ था ।श्री राम भगवान विष्णु के सातवें  अवतार थे ।जब जब धरती पर पाप बढ़ता है भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर पापियों का नाश करते हैं ।प्रभु श्री राम ने लोगों को सत्य ,धैर्य ,ईमानदारी ,संयम, करुणा, त्याग ,समर्पण व मानवता का पाठ पढ़ाया श्रीराम के इन्हीं गुणों के कारण उन्हें "मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम "के रूप में आज भी समस्त पृथ्वी पर पूजा जाता है।

            🚩🚩🚩🚩जय श्री राम🚩🚩🚩🚩

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