प्रेम

एक समय की बात है उद्धव ने श्रीकृष्ण से पूछा कि, "कृष्ण तुम्हारे जीवन में आठ पटरानी , गोपियों का प्रेम प्राप्त हुआ और अनगिनत लोगों ने तुम पर अपना प्रेम निछावर किया ,परंतु तुम्हारा प्रेम केवल राधा- कृष्ण के नाम से ही क्यों अमर हुआ कृष्ण ने शांत मन से उद्धव की सारी बातें सुनी और मुस्कुराने लगे ।

अचानक श्री कृष्ण के सिर में दर्द होने लगा उन्होंने कहा, " हेउद्धव मेरी सभी रानियों से, गोपियों से और राधा से कहो अपने चरणों की धूल दे, दे मैं अपने माथे से लगा लूंगा तो मेरा सिर दर्द ठीक हो जाएगा ।

उन्होंने रथ निकाला और सभी रानियों के, गोपियों के पास एक-एक करके गए और उनके चरणों की धूल मांगने लगे और कहा ,"कान्हा के सिर में दर्द है तुम्हारे चरणों की धूल लगाएंगे ,तो दर्द चला जाएगा । सब ने यह कहकर मना कर दिया कि," वह मेरे पति परमेश्वर है, मैं यह पाप नहीं कर सकती ।मैं अपने चरणों की धूल नहीं दे सकती ।

अंत में उद्धव जी राधा के पास गए उन्होंने राधा जी को सारा वृत्तांत सुनाया राधा जी सुनते ही विह्वल हो गई,  उन्होंने झट से अपने पैरों की धूल उद्धव को दे दी और कहा जल्दी जाओ और मेरे कान्हा को लगा दो उनके सिर का दर्द जल्द से जल्द ठीक हो जाना चाहिए कहते- कहते उनकी आंखें भर आई ।

उद्धव जी राधा जी के चरणों की रज लेकर कान्हा के पास पहुंचे कान्हा ने कहा उद्धव अब समझे कृष्ण और राधा का प्रेम ।उद्धव प्रभु के चरणों में नतमस्तक हो गए ।

श्री कृष्ण ने कहा ,"जहां वाद विवाद है, वहां प्रेम नहीं । एक ने कहा दूसरे ने मान लिया, वही सच्चा प्रेम है ।

                  ।। राधे - कृष्ण ।।

 

 

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