किस्मत

                     बहुत समय पहले की बात है एक राजा थे उनकी चार पुत्रियां थी । राजा बहुत ही दयालु प्रवृत्ति के थे, उनके राज्य में उनकी प्रजा बहुत खुशहाल थी । राजा समय-समय पर अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए राज्य में भ्रमण करते थे ।

 

                  एक दिन उनके मन में विचार आया क्यों ना मैं अपनी पुत्रियों से पाई हालचाल  लूँ कि वह जो इन सारी सुख- सुविधाओं का उपभोग कर रही है तो वह इसका श्रेय किसे दे रही है । राजा ने एक-एक करके अपनी चारों पुत्रियों को बुलाया राजा ने अपनी पहली पुत्री से पूछा ,'पुत्री आप मेरे राज्य में सुख से जीवन यापन कर रही हो उसका श्रेय आप  किसे देना चाहती हो' ? 'पिताश्री इसका सारा श्रेय में आपको देना चाहती हूं आपकी छत्रछाया में मैं सुख से अपना जीवन यापन कर रही हूं । राजा अत्यंत प्रसन्न हुए , उन्होंने अपनी दूसरी पुत्री को बुलाया उन्होंने कहा बेटी आप मेरे परिवार में जो इस प्रकार का सुख का भोग कर रही है उसका श्रेय आप किसे देना चाहती हो? राजा की दूसरी पुत्री ने कहा,'पिताजी निस्संदेह इसका सारा श्रेय आपको और आपकी मेहनत को जाता है ,जो आप के राज में आपकी प्रजा और आपका परिवार सुख से जीवन यापन कर रहा है । राजा की प्रसन्नता की कोई सीमा न रही । राजा ने अपनी तीसरी पुत्री को बुलाया और वही प्रश्न फिर से दोहराया कि पुत्री तुम जो सारी सुख सुविधाओं का भोग कर रही हो उसका सारा श्रेय आप किसे देना चाहती हो तीसरी पुत्री ने भी अपनी दोनों बहनों की तरह अपने पिता को ही श्रेय दिया। आप महान है आपकी छत्रछाया में प्रजा से लेकर आप का राजघराना तक सभी संतुष्ट है और सभी सुखी हैं ।

 

राजा ने अपनी चौथी पुत्री को बुलाया और पूछा," बेटी आप जो मेरे राज्य में सारी सुख- सुविधाओं का भोग कर रही हो उसका श्रेय आप किसे देना चाहती हो ?राजा की चौथी पुत्री बहुत ही सुंदर ,सुशील और बुद्धिमान थी उसने कहा ,'पिता श्री निसंदेह आप दयालु है मेहनती है आप प्रजा का और अपने परिवार का ध्यान देते हैं लेकिन आपने जो प्रश्न किया है कि इन सारी सुख सुविधाओं का जो मैं भोग कर रही हूँ उसका श्रेय में अपनी किस्मत को देना चाहती हूँ। पिताश्री क्योंकि मेरी किस्मत में है इन सारी सुख सुविधाओं का भोग करना इसलिए मैं कर रही हूं ।

 

राजा छोटी पुत्री के उत्तर से बहुत ही क्रोधित हुए उन्होंने सिपाहियों को छोटी पुत्री पर राजद्रोह का आरोप लगाते हुए उसे देश निकाला दे दिया । राजा का आज्ञा मानकर सिपाही राजा की चौथी पुत्री को जंगल में ले जाकर छोड़ दिए राजा की चौथी पुत्री को जंगल में छोड़ते ही राजा के राज्य पर पड़ोसी राज्यों के राजाओं ने आक्रमण कर दिया और  दूसरी तरफ राजा की चौथी पुत्री जंगल में भटकते- भटकते एक नदी किनारे बैठी थी । तभी वहां पर एक दूसरी पड़ोसी राज्य का युवराज शिकार करते हुए आया उसकी दृष्टि राजकुमारी पर पड़ी उसने आकर राजकुमारी से सारा हालचाल पूछा राजकुमारी ने सारा वृत्तांत सुनाया। राजकुमार ने कहा मैं  आपकी बुद्धिमत्ता और सुंदरता से अत्यंत प्रभावित हूं ।मैं आपसे विवाह करके आपको अपने राज्य में ले जाना चाहता हूं ।

                        राजकुमारी राज्य और राजा के बारे में पहले से ही जानती थी इसलिए उसने  विवाह का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया , और युवराज के साथ विवाह करके उनके राज्य में चली गई ।लेकिन जैसे ही राजकुमारी को अपने पिता के राज्य  की जानकारी प्राप्त हुई । वह बहुत दुखी हुई उसने अपने पति से कहकर अपनी पिता की मदद करवाईऔर राज्य पुनः दिलवाया ।

 

                      राजा की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे , उसने कहा पुत्री तुम सही कहती थी कि भगवान जन्म देने के साथ में किस्मत लिख कर भेजते हैं। तुम्हारी किस्मत में राजयोग था तो तुम मेरे पास भी सुख सुविधाएं भोग रही थी मेरे घर से निकालने के बाद भी तुम सुविधाएं भोग रही थी मैं ही घमंड में था,  कि मैं सबको दे रहा हूं लेकिन मैं यह भूल गया कि मैं किस की किस्मत से सबको दे रहा हूं ।

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