कृष्ण का संदेश

सुनो द्रोपदी ,स्वयं को पहचानो ।

फिर से गोविंद आएंगे ,  मुरली मधुर बजा आएंगे ।।

नारी तू अंबा , तू जगदंबा ।

किया था अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित मैंने ।।

कैसे भूली तुम मेरे गीता के उपदेश को ,

होगी हानि जब-जब धर्म की ,

दौड़ा आऊंगा मैं तब - तब मुरली मधुर बजाऊँगा ।।

संरक्षण में रहना ही सीखी तुम ,

 हो शक्ति स्वरूपा कैसे भूली तुम ?

राक्षसों का संहार करने को शरणागत हुए थे सब देवमुनी ।। स्वयं याचक हो तुम बनी ,

सौंदर्य अधूरा है सृष्टि का तुम बिन ,

गूंगी धरा- सरोवर है तुम बिन ,

नवजीवन का संचार नही है तुम बिन ,

नर -नारायण है अधूरे तुम बिन ।

बुलाओ अंतः करण से मुझको दौड़ा आऊंगा तत्क्षण मैं ,  फिर न कहना अब न गोविंद आएंगे ।।🙏

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