कृष्ण के कंगन

                 बहुत समय पहले की बात है राजस्थान के जयपुर में गोविंद  जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है ।जहां पर पंडित जी रोज भगवान को शाम की आरती करके उनके पास चार लड्डू रखकर मंदिर के दरवाजे बंद करके चले जाते थे। परंतु एक दिन पंडित जी चार लड्डू रखना भूल गए लड्डू इसलिए रखे जाते थे कि भगवान को यदि रात को भूख लगे तो वह यह लड्डू खा ले ।

               रात को भगवान कृष्ण जी को भूख लगती है तो वह मंदिर से निकलकर हलवाई की दुकान पर चले जाते हैं और उसे चार लड्डू मांगते हैं हलवाई कहता है कि बिना पैसे के मैं लड्डू नहीं दूंगा। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरे पास पैसे नहीं है  यह मेरे हाथ में सोने के कड़े है उसे ले लो और मुझे लड्डू दे दो।   मिठाई वाले के मन में लालच आ जाता है वह कड़े लेकर भगवान को चार लड्डू दे देता है।    

              सुबह पंडित जी जब मंदिर का पट खोलते हैं स्नान कराते समय श्री कृष्ण भगवान के हाथ के कंगन गायब देखकर वह घबरा जाते हैं और इसकी सूचना तुरंत वह महाराज को देते हैं। महाराज पूरे शहर में मुनादी करवा देते हैं कि श्री कृष्ण भगवान के हाथ के कंगन जिसने भी चुराए हैं तुरंत वापस कर दें अथवा उसे मृत्यु दंड दिया जाएगा।

                मिठाईवाला यह सब सुनकर भयभीत हो जाता है और महाराज के पास आकर उस नन्हे बालक की कथा सुना देता है ।महाराज को समझने में जरा भी देर नहीं लगती कि वह स्वयं कृष्ण जी है जो लड्डू लेने गए थे तो महाराज ने पंडित जी से पूछा कि क्या  आप कल रात को चार लड्डू मंदिर में रखना भूल गए थे ।पंडित जी ने कहा क्षमा चाहता हूं महाराज में चार लड्डू रखना भूल गया था।

               महाराज ने आदेश दिया कि आज के बाद बांके बिहारी के मंदिर में चार लड्डू रखना पंडित जी भूलेंगे नहीं। मिठाई वाले को बहुत पछतावा हुआ कि वह भगवान श्री कृष्ण को पहचानना सका और उनसे कंगन लेकर लड्डू दिया तब से आज तक मिठाईवाला उस मंदिर में हमेशा चार लड्डू भिजवाता है सभी को प्रसाद रूप में बांटने के लिए।

            मंदिर के पट आज भी बार-बार ढक दिए जाते हैं  क्योंकि भगवान इतने भोले हैं कि कहीं अपने भक्तों के प्रेम में मंदिर छोड़कर चले ना जाएं ।

                 ।।राधे राधे।।

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